विज्ञान के क्षेत्र में भारत का गौरवशाली योगदान

भारत के वैज्ञानिक और उनके योगदान | Indian Scientist and Their Contribution

भारतीय उप-महाद्वीप में विज्ञान की उन्नति आश्चर्यजनक थी। प्राचीन भारत के ज्ञानियों को विज्ञान के अनजान और गूढ़ तथ्यों को सुलझाने में अनेक कामयाबी मिली। गणित, भौतिक एवं रसायन शास्त्र, खगोल विद्या, चिकित्सा विज्ञान आदि में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसी श्रृंखला में इस से वर्ष भी हम कुछ वैज्ञानिकों के चिंतन तथा वैज्ञानिक पद्धति से मानव जीवन में आए क्रांतिकारी परिवर्तनों का अध्ययन करेंगे।

अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम ( डॉ एपीजे अब्दुल कलाम )

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में ‘मिसाइल मैन’ के रूप में जाना जाता है। ये भारत के राष्टपति भी रह चुके हैं, पोखरान के परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई।

शिशिर कुमार मित्र

शिशिर कुमार मित्र, ने आइनोस्फीयर के अध्ययन में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रात में आकाश गहरा काला लगने के स्थान पर धूमिल काला क्यों लगता है? उनके विचार से इसका कारण आयनमंडल की एक परत में आयंस की उपस्थिति का होना है, जो प्रकाश को फैलाते हैं। इसे “रात्रि आकाश की आलोक दीप्ति” कहते हैं। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तक ‘अपर एटमॉस्फीयर” पूरी दुनियाँ में सराही गयी है।

राजा रामन्ना

राजा रामन्ना, का मूलभूत योगदान नाभिकीय विखण्डन के क्षेत्र में है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को बिना किसी हानिकारक प्रभाव के नियंत्रित करने | और उसका शांतिपूर्ण प्रयोग करने की दिशा में कार्य किया। पोखरण परमाणु परीक्षण रामन्ना का ही विचार था। देश के परमाणु रिएक्टर, अप्सरा, सिरस और पूर्णिमा की रूपरेखा और स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

के. एस. कृष्णन

के. एस. कृष्णन, केवल वैज्ञानिक ही नहीं भौतिकशास्त्री एवं दार्शनिक भी थे। कृष्णन ने ठोस पदार्थों में अणुओं की सुंदर क्रमबद्धता का तथा उन शक्तियों का अध्ययन किया जो अणुओं या परमाणुओं को व्यवस्थित रखती हैं। उन्होंने किसी गरम पदार्थ से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन्स के व्यवहार एवं नियंत्रण प्रक्रिया का अध्ययन किया।

सत्येन्द्रनाथ बोस

सत्येन्द्रनाथ बोस, ने विकिरण के व्यवहार को समझाने के लिए एक नए प्रकार की सांख्यिकी (बोस सांख्यिकी) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी । इसी तारतम्य में मूल तत्व के कण जैसे फोटोन्स और अल्फा कण जो बोस सांख्यिकी के सिद्धांत को मानते हैं उन्हें बोसोन्स कहा गया। बोस ने भौतिकी की अन्य शाखाओं में जैसे एक्स रे, क्रिस्टलोग्राफी और थर्मोल्युिमिनिसेन्स पर भी प्रयोग किए। उनके द्वारा बनाया गया रासायनिक पदार्थ आँखों में दवाई के रूप में आज तक जाना जाता है।

बीरबल साहनी

बीरबल साहनी ये जीवाश्मे वनस्पति विज्ञानी थे। उन्होंने फर्न, कोनिफर्स और जीवाश्म पौधों पर शोध कार्य किया। उनके द्वारा कुछ नए जीन्स की खोज की गयी। उनके कुछ आविष्कारों ने प्राचीन पौधों और आधुनिक पौधों के बीच विकास क्रम के संबंध को समझने में मदद की। उन्होंने एक नए समूह के जीवाश्म पौधों (जिम्नोस्पर्म) की खोज की

जॉन वर्डन सैडरसन हाल्डेन

जॉन वर्डन सैडरसन हाल्डेन, जन्म से अंग्रेज थे मगर बाद में उन्होंने भारत की नागरिकता ले ली थी। इन्होंने अनेक विषयों जैसे शरीरक्रिया विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, जीवविकास, आनुवांशिकी, जीव रसायन, गणित और कॉस्मोलॉजी आदि में मौलिक योगदान दिया। वे स्वयं पर प्रयोग परीक्षण करने के लिए प्रसिद्ध थे।

सालिम अली

सालिम अली, वे पक्षी विज्ञानी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने “बुक ऑफ़ इंडियन बर्ड्स” लिखी है जिसमें पक्षियों की प्रत्येक जाति का सुंदर वर्णन तथा चित्र भी हैं। उनके द्वारा डिलन रिप्ले के साथ लिखी गयी पुस्तक हैंड बुक ऑफ द बर्डस् आफ इंडिया एण्ड पाकिस्तान (दस खण्ड ) इस उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले पक्षियों की जानकारी देती है।

प्रफुल्ल चंद्र रे

प्रफुल्ल चंद्र रे, भारत के रसायन उद्योग का प्रर्वतक माना जाता है। उन्होंने भारत में रसायन शास्त्र के शोध केन्द्रों का विकास किया। 1896 में मरक्यूरस नाइट्रेट की खोज रसायन विज्ञान को उनका मुख्य योगदान है।

आशिमा चटर्जी

आशिमा चटर्जी, का जन्म 1917 में हुआ था। इन्होंने भारत में पाए जाने वाले औषधीय पौधों पर शोध किया। इन्होंने उन पौधों में पाए जाने वाले रसायन की औषधीय महत्ता को बताया जिससे इनका औद्योगिक उत्पादन हो पाया।

अन्ना मनी

अन्ना मनी, ये भारतीय मेटेरोलॉजिक संस्थान की डिप्टी डायरेक्टर थी साथ ही रमन शोध संस्थान की अतिथि प्राध्यापक भी रहीं। इन्होंने हीरे तथा रूबी की स्पेक्ट्रो स्कोपी पर कार्य किया। इनके द्वारा पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया।

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